उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू: शादी, संपत्ति और रिलेशनशिप में क्या बदलाव होंगे?

20 जनवरी 2025 से उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू! जानें शादी, लिव-इन, संपत्ति अधिकार, हलाला प्रथा और बहुविवाह पर 10 अहम बदलाव। UCC के नए नियमों की पूरी जानकारी यहाँ पढ़ें।

उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू: जानें क्या है नया कानून और इसके प्रमुख प्रावधान

उत्तराखंड ने 20 जनवरी 2025 को यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) लागू करके इतिहास रच दिया है। यह आजादी के बाद किसी भी भारतीय राज्य द्वारा UCC लागू करने की पहली घटना है। इसके तहत शादी, तलाक, संपत्ति, और लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े सभी नियम अब धर्म-निरपेक्ष होंगे। आइए समझते हैं UCC के प्रमुख बदलाव और आम नागरिकों के लिए इसके प्रभाव।

UCC लागू होने की टाइमलाइन

  • 27 मई 2022: विशेषज्ञ समिति का गठन।

  • 2 फरवरी 2024: समिति ने सरकार को रिपोर्ट सौंपी।

  • 8 मार्च 2024: विधानसभा में बिल पारित।

  • 12 मार्च 2024: राष्ट्रपति की मंजूरी।

  • 20 जनवरी 2025: कैबिनेट द्वारा नियमावली को अंतिम स्वीकृति।

यूसीसी के 10 प्रमुख बदलाव और नए नियम

1. शादी का अनिवार्य रजिस्ट्रेशन

  • कट-ऑफ डेट: 27 मार्च 2010 के बाद हुई सभी शादियों का 6 महीने के अंदर रजिस्ट्रेशन करवाना अनिवार्य।

  • जुर्माना: रजिस्ट्रेशन न कराने पर ₹25,000 तक का अर्थदंड और सरकारी सुविधाओं से वंचित होना।

  • दस्तावेज: आधार कार्ड, निवास प्रमाण, जन्म प्रमाण पत्र, शादी का कार्ड, और 2 गवाहों के आधार कार्ड (मोबाइल लिंक अनिवार्य)।

  • पोर्टल: CSC कॉमन सर्विस सेंटर पर ऑनलाइन आवेदन।

2. लिव-इन रिलेशनशिप का रजिस्ट्रेशन

  • अनिवार्य सूचना: 1 महीने से अधिक साथ रहने वाले कपल्स को रजिस्ट्रार को सूचित करना होगा।

  • माता-पिता की अनुमति: लिव-इन में रहने के लिए अभिभावकों की सहमति जरूरी।

  • जुर्माना: सूचना न देने पर ₹10,000 का दंड।

  • बच्चों के अधिकार: ऐसे रिश्तों में जन्मे बच्चे वैध माने जाएंगे और महिला गुजारा भत्ता मांग सकती है।

3. सभी धर्मों में शादी की न्यूनतम उम्र

  • लड़कियों के लिए: 18 वर्ष, लड़कों के लिए 21 वर्ष।

  • प्रभाव: मुस्लिम समुदाय में निकाह के लिए भी यही उम्र मानक।

4 तलाक का रजिस्ट्रेशन

  • तलाक लेने के 30 दिनों के भीतर ऑनलाइन/ऑफलाइन सूचना देना अनिवार्य।

5. हलाला और बहुविवाह पर प्रतिबंध

  • हलाला प्रथा: अब मुस्लिम महिलाओं को दोबारा शादी के लिए किसी तीसरे व्यक्ति से निकाह करने की जरूरत नहीं।

  • बहुविवाह: किसी भी धर्म में एक से अधिक शादी करना अवैध।

6. संपत्ति में बेटी-बेटा का समान अधिकार

  • नया नियम: प्राकृतिक, लिव-इन या अन्य संबंधों से जन्मे सभी बच्चों को संपत्ति में बराबर हिस्सा।

7. माता-पिता का संपत्ति अधिकार

  • किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद संपत्ति पर पत्नी, बच्चों और माता-पिता का समान दावा।

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8. वसीयत के समान नियम

  • सभी धर्मों के लिए वसीयत बनाने का एक ही प्रारूप।

9. गोद लेने के नए नियम

  • प्रतिबंध: दूसरे धर्म के बच्चे को गोद लेना अवैध।

10. अनुसूचित जनजाति और ट्रांसजेंडर को छूट

  • UCC के दायरे से बाहर रखे गए इन समुदायों के रीति-रिवाज।

UCC का उद्देश्य और महत्व

समान नागरिक संहिता का मुख्य लक्ष्य धर्म, लिंग और समुदाय के आधार पर भेदभाव को खत्म करना है। इससे महिलाओं को विरासत और विवाह में अधिकार मिलेंगे, साथ ही कानूनी प्रक्रियाएँ सरल होंगी।

निष्कर्ष

उत्तराखंड का UCC मॉडल देश के अन्य राज्यों के लिए एक मिसाल बन सकता है। नागरिकों को शादी, संपत्ति और रिलेशनशिप से जुड़े नए नियमों का पालन करने के लिए 6 महीने का समय मिला है। अधिक जानकारी के लिए UCC आधिकारिक पोर्टल पर जाएँ या कानूनी विशेषज्ञ से सलाह लें।

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